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Thursday, August 16, 2018

शिव




हम सब में है शिव ही शिव
और शिव में है यह जग सारा
शिव-भक्ति में बनें जो शिव
तो अनुपम हो जीवन धारा

शिव सा सुन्दर जीवन हो यह
नेह भरा हो एक-एक क्षण
शिव समग्र में पा जाएँ
शिव से जागृत हों कण-कण

शिव से सत्य का बंधन है
अद्भुत-सौम्य-अतिसुन्दर
किधर ढूँढे शिव को प्राणी
झाँक तनिक अपने अंदर

कर मंथन अपने मन का
सत्य-मिथ्य जो पहचानेगा
रज-रज में व स्वयं में बस
शिव ही शिव को पाएगा

- रोहिणी झा, 'अंतस : कविता-संग्रह' 

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